जिंदगी अपनी भी गुल-ए-ख़्वाब हो जाती,
मैं कनेर हो जाता, तू गुलाब हो जाती।
तेरी ही आरजू में फिरता यहाँ वहाँ,
मैं मुसाफिर होता, तू सराब हो जाती।
-संजू


जिंदगी अपनी भी गुल-ए-ख़्वाब हो जाती,
मैं कनेर हो जाता, तू गुलाब हो जाती।
तेरी ही आरजू में फिरता यहाँ वहाँ,
मैं मुसाफिर होता, तू सराब हो जाती।
-संजू