Poetry 1 min read 774.8K reads

चाँद को खिड़की से


सुनो तुम रात चाँद को,खिड़की से देखते हो क्या,अगर हाँ तो बताना,मैं तुम्हारे लिये चाँद के हाथ,कोई पैगाम भेज दूंगा।

अगर नहीं देखते हो,तो भी गम नहीं,मैं सुबह ओंस के साथ,अपने कुछ आंसू,तेरे नाम भेज दूंगा।

— संजू
Read more Earn more Learn more