रात भर जगती अँखियां,

राह उसकी तकती अँखियां,

आंसुओं का बाँध है इनमें,

रो नहीं सकती अँखियां।


ये शहर उजालों का शहर है,

दिन रात यहाँ जलती अँखियां,

एक झलक पाने को उसकी,

मीलों तक चलती अँखियां।


इक पल हंसना इक पल रोना,

क्षण में रंग बदलती अँखियां,

दोष इन्सां का नहीं है,

दिल को हैं छलती अँखियां।


मुमकिन नहीं अब लौटना उसका,

व्यर्थ भाव बिलखती अँखियां,

बीते लम्हों को याद करके,

तन्हाई में सिसकती अँखियां।


उसकी चाहतों के भँवर में,

व्याकुल सी रहती अँखियां,

रोज एक ही चेहरे पर,

नज़्म नई कहती अँखियां


-संजू