अजब दौर से गुजर रहे हैं,
इंसान इंसानों से डर रहे हैं।
देश बीमारी से जूझ रहा है,
हाकिम रैलियां कर रहे हैं।
गरीब और भी गरीब हुआ है,
अमीर झोलियाँ भर रहे हैं।
ऋषि चरक के वंशज आज,
बिन ऑक्सीजन ही मर रहे हैं।
जन चिताओं पर लेटे हैं,
प्रतिनिधि कुर्सियां धर रहे हैं।
खुशहाली के ख्वाब दिखाकर,
अब वादों से मुकर रहे हैं।
याद रखना ये ताज़ो तख़्त,
कब तक किसी के सर रहे हैं।
-संजू


