बरसों पुरानी तस्वीर लेकर शाद रहता है,

दिल का एक कोना आज भी आबाद रहता है।


कितनी भी चलें रात भर गमों की आंधियाँ,

उम्मीद का दिया सुबह तक नाबाद रहता है।


इतना भी नाजुक बदन कोई कैसे हो गया,

दरमियां फूलों के ये फ़साद रहता है।


जोड़ कर बाजार में रख तो दूँ खुद को मगर,

टूटी शय का दाम अक्सर कसाद रहता है।


तू तो हाकिम है भूल सकता है सब कुछ,

मैं मुलाज़िम हूँ मुझे सब याद रहता है।


लाख बंदिशें लगा लो आशिकों पे तुम,

इश्क़ अबद की तरह आज़ाद रहता है।


-संजू