हाँ तुम ही तो हो


मेरे लिखने के प्रयास में

जीने के एहसास में

मेरी हर एक साँस में

मेरे एक अभिलाष में

तुम ही तो हो ।


जैसे हरियाली हो घास में

वैसे हर पल मेरे पास में

अधरों की मेरी प्यास में

सिर्फ मेरे हो जाने की आस में

तुम ही तो हो ।


जैसे सिया राम वनवास में

मेरे सुख में मेरे त्रास में

होश में बदहवास में

मेरे मित्रों में से खास में

तुम ही तो हो ।


जैसे राधा कृष्ण के रास में

मैं बावला तेरे हेत्वाभास में

एक वर्ष के हर इक मास में

मेरे हर दिन की अरदास में

तुम ही तो हो ।


अलंकारों से अनुप्रास में

मेरी कलम के किए आयास में

मेरे प्रेम के विश्वास में

जीवन की अंतिम श्वास में

तुम हो.. तुम ही तो हो ।