बिटिया के जन्मदिन के अवसर पर सादर प्रस्तुत।


बीस वर्ष पहले मेरे घर में

प्यारी बिटिया आई थी|

सबके चेहरे खिले हुए थे

नयी ख़ुशी सी छाई थी|


जिसको जो अच्छा लगता था

वही नाम दे जाता था|

कोई ढोलकी कोई सूमो 

गालो कोई बुलाता था|

न्यारी छवि उसकी माँ 

‘छवि’ ही नाम बुलाई थी|

बीस वर्ष पहले मेरे घर में

प्यारी बिटिया आई थी|


समय बीतते देर न लगता

अब वो देखो बड़ी हुई 

ज्यादा समझदार पर थोड़ी सी नकचढ़ी हुई|

हमलोगों को कभी कभी वो 

ऐसी बात बताती है

लगता कितना अनुभव रखती  

ऐसे मार्ग दिखाती है|

अपने इन्हीं गुणों के चलते

सब पर धौस जमाती थी|

बीस वर्ष पहले मेरे घर में

प्यारी बिटिया आई थी|


क्या बेटा क्या बेटी 

सब तो इश्वर की सौगात है |

दोनों दो आँखे है मेरी 

और मेरी औकात हैं|

इश्वर सदा ख़ुशी उसको दें

क्यूंकि ख़ुशी लुटाने आई थी|

बीस वर्ष पहले मेरे घर में

प्यारी बिटिया आई थी|