वो शर्मीली-सी,वो सांवली-सी 

किसी से न डरने वाली,वो बावली-सी

सपनों में रोज आती है

ठहरती नहीं, बस ये बताती है; 

किससे,कबतक,डरते रहोगे तुम, 

झूठों के लिए लड़ते रहोगे तुम। 

आओ, मिलकर अब ये ऐलान करे 

मेरी पहली मुहब्बत तुम। 

मेरी आखिरी मुहब्बत तुम।