वो शर्मीली-सी,वो सांवली-सी
किसी से न डरने वाली,वो बावली-सी
सपनों में रोज आती है
ठहरती नहीं, बस ये बताती है;
किससे,कबतक,डरते रहोगे तुम,
झूठों के लिए लड़ते रहोगे तुम।
आओ, मिलकर अब ये ऐलान करे
मेरी पहली मुहब्बत तुम।
मेरी आखिरी मुहब्बत तुम।


वो शर्मीली-सी,वो सांवली-सी
किसी से न डरने वाली,वो बावली-सी
सपनों में रोज आती है
ठहरती नहीं, बस ये बताती है;
किससे,कबतक,डरते रहोगे तुम,
झूठों के लिए लड़ते रहोगे तुम।
आओ, मिलकर अब ये ऐलान करे
मेरी पहली मुहब्बत तुम।
मेरी आखिरी मुहब्बत तुम।