“संजय! कब आ रहे हो मिलने मुझसे?”
“आऊंगा! जरूर आऊंगा! मेरा भरोसा करो ज्योति।”
“मुझे डर लगता है संजय! कहीं कोई हमपर नज़र रख रहा है शायद!”
“अरे! बेवजह परेशान होती हो तुम। हम योगी की दुनिया से दूर चले जाएंगे,बहुत दूर। मेरे,तुम्हारे यूँ कहें तो हमारे ख्वाबों की दुनियाँ में।”
“हे भगवान! ये क्अअया-क्या बोल रहे हो तुम! कहीं खुदकुशी.......... ”
“और नहीं तो क्या ज्योति! मुहब्बत में तो मोदी नहीं हो सकते न!”


