कभी किसी को यूँ मेरा इंतजार हो।
कोई हो जो मेरे वास्ते भी बीमार हो।
बमुश्किल ही मिले, मगर जब मिले
लिपटे यूँ कि मेरा ही कोई किरदार हो।
राहें कहाँ एक रहती है मंज़िल तक
जब तलक हो, बस प्यार ही प्यार हो।
तल्ख़ियाँ भी होंगी, बातें भी रुकेंगी
कभी मैं कहूँ, कभी उसका इज़हार हो।
मैं आवाज दूँ, साथ चलूँ, बात करूं
कोई हो तो सही, जिसपे एतबार हो।


