बातों ही बातों में

पूछ बैठी।


किसी से प्यार है - नहीं तो!

किसी का इंतजार है - नहीं तो!

फिर चेहरे पे उदासी - नहीं तो!


बस

उसने और कुछ नहीं पूछा

और मैं खो गया -

यादें, तस्वीरें, कहानियाँ

तारीफें, तंज, किलकारियाँ।

एक चलचित्र - सा चलने लगा

जेहन में भी,

आँखों में भी।


अफ़सोस

आँखों से कुछ छुपा न सका,

और

मैं रो पड़ा।

~Sanjay Hrishu