वक्त बदला और होली के रंग बदल गए,
रंग लाल गुलाबी नीले पीले से बेअकल और बदतमीज हो गए।
कल जब हम पड़ोसी पर गुब्बारा मारते थे,
वह काका हंस कर कहते थे ,
आज पीला ही गुलाबी कहां गया!
ना हो तो मुझसे ले जाना,
देखना कोई बचने ना पाए ,
सबको रंगों में नहला जाना .
रंग टपकते कपड़ों से एक सज्जन मेरे घर आए,
बोले आपका बच्चा बड़ा शरारती है .
गुब्बारा मारता है ,जरा उसको अक्कल सिखाएं.
हम स्तब्ध खड़े देखते रह गए ,
खुद ना समझ पाए उसे क्या समझाएं,
होली के रंग न जाने कहां खो गए ,
बस बेरंग और बेजुबान लोग रह गए.


