#वह बालिका's image
Share0 Bookmarks 57321 Reads1 Likes
गोबर से लीप रही घर की ड्योढी वह बालिका
रूखे बालों में अटका कूढ़े से मिला रिबन पुराना
नन्हे कोमल बदन पर अपने, 
आधा ढका वस्त्र नीचे खींच रही वह बालिका।

कौतूहल से भरी आँखें माँ संग कूड़ा बीनती ऐसे
नन्हे सपनों को अपने चुन रही हो वह जैसे।

साँझ हुए जाना फुटपाथ हाथ फैला माँगने भीख
डर लगता है माँ, हाथ लगाता वो मुच्छड़ मालिक
समझा ना पाए माँ को वह बाल

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts