क्या ये चीख़ता चिल्लाता मीडिया,
उस ख़ामोश, बेबस, बेसहारा की आवाज़ है,
जो ख़ुद बोल नहीं पाता।
या ख़ुद की छटपटाहट को,
आवाज़ देने की, यह उसकी कोई साज़िश है।
-संदीप गुप्ता SandySoil


क्या ये चीख़ता चिल्लाता मीडिया,
उस ख़ामोश, बेबस, बेसहारा की आवाज़ है,
जो ख़ुद बोल नहीं पाता।
या ख़ुद की छटपटाहट को,
आवाज़ देने की, यह उसकी कोई साज़िश है।
-संदीप गुप्ता SandySoil