माना कि मुमकिन न था तेरे लिए घर मेरे आना,
कभी वक्त का तकाज़ा था कभी हालत का बहाना।
हम भी कहाँ पलकें बिछाए बैठे थे इंतज़ार में तेरे,
बैठे थे हम तो लेके, तुझसे न मिलने का बहाना।
-संदीप गुप्ता SanduSoil


माना कि मुमकिन न था तेरे लिए घर मेरे आना,
कभी वक्त का तकाज़ा था कभी हालत का बहाना।
हम भी कहाँ पलकें बिछाए बैठे थे इंतज़ार में तेरे,
बैठे थे हम तो लेके, तुझसे न मिलने का बहाना।
-संदीप गुप्ता SanduSoil