तेरा इश्क़ समंदर है।

मेरा इश्क़ है इक दरिया।

मैं काट बीहड़ बीहड़, 

मीलों चले आती हूँ,

तू बाहें फैला देता है,

मैं तुझमें समा जाती हूँ।

तेरा इश्क़ समंदर है।


जो चाहे इश्क़ फ़रमाना,

तेरे पास चला आता है,

तू मस्त, मगन, मनमौजी,

गले सबको लगाता है,

जो पास तेरे आता है,

तुझमें समा जाता है।

तेरा इश्क़ समंदर है।


-संदीप गुप्ता SandySoil