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तासीर-ए-इश्क़


कोई कहता है तासीर-ए-इश्क़ है बुरा,कोई कहता है गलियाँ-ए-इश्क़ हैं बुरी,

पिए जाते हैं ज़ाम-ए-इश्क़ फिर क्यूँ सभी?कूद जाते हैं दरिया-ए-इश्क़ में फिर क्यूँ सभी?

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