
श्रम से चलती धुरी धरा की, जानत है हर कोय,
स्वेद बहता श्रम करने में, रंक हो या राजा होय।
सुन रे, मति संसार की ऐस
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श्रम से चलती धुरी धरा की, जानत है हर कोय,
स्वेद बहता श्रम करने में, रंक हो या राजा होय।
सुन रे, मति संसार की ऐस