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सुन रे #2 (नक़ाब)

जीवन तो है ४ दिन, जानत है हर कोय,

फिर काहे लगा नक़ाब सौ, सब फिरत रहे इतराय।

सुन रे, मति संसार की ऐसी फिरी है आज,

सूरत रास ना आवे वो, जि

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