जीवन तो है ४ दिन, जानत है हर कोय,
फिर काहे लगा नक़ाब सौ, सब फिरत रहे इतराय।
सुन रे, मति संसार की ऐसी फिरी है आज,
सूरत रास ना आवे वो, जिसपे नक़ाब न कोय।
-संदीप गुप्ता SandySoil


जीवन तो है ४ दिन, जानत है हर कोय,
फिर काहे लगा नक़ाब सौ, सब फिरत रहे इतराय।
सुन रे, मति संसार की ऐसी फिरी है आज,
सूरत रास ना आवे वो, जिसपे नक़ाब न कोय।
-संदीप गुप्ता SandySoil