कैसे चढ़ता इश्क़ ये परवान तेरा मेरा,

तुम ज़ख़्म दिखाते रहे, हम नज़्म सुनाते रहे,

हम हाल-ए-दिल पूछते रहे, तुम मुस्कुराते रहे।


-संदीप गुप्ता SandySoil