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कहासुनी #5

चलो चाँद पर चलते हैं!

पर क्यों?

देख नहीं रहे तुम,

ज़मीं पर सब कुछ ठीक नहीं।

क्या ठीक नहीं?

देखा नहीं तुमने,

हाल इंसान का,

इंसान के तीमारदार का,

हाल इंसानियत का।

पर मैं क्यों साथ चलूँ?

ये तो बताओ, 

मुझे तो ज़मीं ही लगती है भली।

एक

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