जश्न-ए-बहार देख पाओगे तुम, यक़ीनन,जलसे में नहीं, खिड़कियों से ही सही।पर उनका क्या,जिनके घरों में खिड़कियाँ हैं ही नहीं।
जश्न-ए-बहार देख पाओगे तुम, यक़ीनन,जलसे में नहीं, खिड़कियों से ही सही।
पर उनका क्या,जिनके घरों में खिड़कियाँ हैं ही नहीं।