जश्न-ए-बहार देख पाओगे तुम, यक़ीनन,

जलसे में नहीं, खिड़कियों से ही सही।

पर उनका क्या,

जिनके घरों में खिड़कियाँ हैं ही नहीं। 


-संदीप गुप्ता SandySoil