जब तूने आसमान देखा,
तुझे उसमें ख़ालीपन दिखा,
देखने को चाँद सितारे भी तो थे।
जब तूने चाँद देखा,
तुझे उसमें दाग़ दिखे,
देखने को चाँदनी भी तो थी।
फर्क सिर्फ नज़रिए का होता है शायद।
कोई देखता है, कि पास क्या है किसी के,
कोई देखता है, कि पास क्या नहीं है किसी के।
-संदीप गुप्ता SandySoil


