जब अँधेरा हाथी जैसा महाकाय हो,

और उजियारा पूँछ जैसा क्षीण,

हमारी शिक्षा इस बात से सिद्ध होती है,

कि हम पूँछ की रोशनी के सहारे, सब के साथ आगे बढ़ते हैं,

या पूँछ को जला, हाथी को देख आनंदित हो खड़े खड़े तालियाँ बजाते हैं।


~संदीप गुप्ता