तूफ़ानों का दौर है,

आँधियाँ तो चलेंगी ही।

टूटेंगी कश्तियाँ भी!

टूटेंगे साहिल भी!

माना कि क़ुव्वत है तुझमें,

तूफ़ानों से लड़ने की ए दोस्त!

वक्त का तक़ाज़ा है,

करने दे तूफ़ानों को काम अपना,

तू, हुनर कश्तियों को बाँधने का बनाए रखना।


-संदीप गुप्ता SandySoil