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हुनर कश्तियों को बाँधने का बनाए रखना

तूफ़ानों का दौर है,

आँधियाँ तो चलेंगी ही।

टूटेंगी कश्तियाँ भी!

टूटेंगे साहिल भी!

माना कि क़ुव्वत है तुझमें,

तूफ़ानों से लड़ने की ए दोस्त!

वक्त का तक़ाज़ा है,

करने दे

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