बाज़ार चुप है इन दिनों,
दुबका है कोने में कहीं,
क्योंकि जेबें बंद हैं।
खुलने दो जेबें,
फिर देखना,
बाज़ार की नयी भाषा,
जो वो सीख रहा है,
इन दिनो, गुपचुप,
चुपके चुपके, दुबक कर कोने में।
-संदीप गुप्ता SandySoil


बाज़ार चुप है इन दिनों,
दुबका है कोने में कहीं,
क्योंकि जेबें बंद हैं।
खुलने दो जेबें,
फिर देखना,
बाज़ार की नयी भाषा,
जो वो सीख रहा है,
इन दिनो, गुपचुप,
चुपके चुपके, दुबक कर कोने में।
-संदीप गुप्ता SandySoil