बात कभी कभी लाख, करोड़ की नहीं,कुछ रुपयों की ही होती है।सही आदमी के हाथ पहुँचे तो कुछ और बात होती है,ग़लत के हाथ पहुँचे तो कुछ और बात होती है।
बात कभी कभी लाख, करोड़ की नहीं,कुछ रुपयों की ही होती है।
सही आदमी के हाथ पहुँचे तो कुछ और बात होती है,ग़लत के हाथ पहुँचे तो कुछ और बात होती है।