बारिश में इस बार,
याद रखना
भीगना है अकेले ही।
बौछारें तेज़ हो कितनी भी,
दिल और छाता,
फड़फड़ाये कितना भी,
न दिल की सुनना,
न छाते की।
दिल टूट जाए, टूट जाने देना,
वो रूठ जाए, रूठ जाने देना।
छाते में ख़ुद को अकेले ही रखना,
मत भूलना सबसे ज़रूरी है,
दो गज़ की दूरी,
चाहे कितनी भी हो मजबूरी,
मास्क लगाए रखना,
दूरी बनाए रखना।
~संदीप गुप्ता SandySoil


