मेरी वफ़ा का ना ले तू इम्तिहाँ इस क़दर,

आइना हूँ!

तेरे हाथों टूट कर भी,

टुकड़े-टुकड़े में,

अक्स तेरा ही तुझे दिखाऊँगा मैं।


-संदीप गुप्ता SandySoil