सीने से मुजको लगाती भी नहीं अब ,
किस्सा ए महोब्बत सुनाती भी नहीं अब
हमसे बिछड़ने के बाद बेहाल हुई बैठी है
कमबख्त हमसे ये सब बताती भी नहीं अब ,
इंतजार करते हैं उसका हम फिर से उस गली में
मिलने आने को बहाने बनाती भी नहीं अब
बदल सी गई है हमसे जुदा होकर वो
शायद किताबों में खत छुपाती भी नहीं अब
आंखों में दरया बन बहती है अब बारिश की बूंदें
पहले की तरह बारिशों में भीग जाती भी नहीं अब
हम उसकी तमाम यादों को जहन में गाढ बैठें हैं
एक उसको ही याद हमारी आती भी नहीं अब
रकीब की गली से गुजरती है आजकल
बड़े शौक़ से नजरें चुराती भी नहीं अब
ता उम्र तेरी यादों के फंदों में रह लूं
तुम्हारी तरह तेरी याद भी आती नहीं अब
प्यार मोहब्बत की बातें वो तराने , बस तूमसे ही थी
वरना महोब्बत की बातें आती भी नहीं अब
तेरे बहाने हमने क्या क्या नहीं खाया
वरना हमको गम ए आरज़ू भी भाती नहीं अब
चांद तारे आज भी यूं ही मुकम्मल है आसमां में
एक वो ही है चांद की तरह शर्माती भी नहीं अब
उड़ती है हवा अब भी मेरे होंठों के बगल से
वो जुल्फों को हवा में लहराती भी नहीं अब
सीने से मुजको लगाती भी नहीं अब ,
किस्सा ए महोब्बत सुनाती भी नहीं अब
अक्सर डहाती थी यूं जुल्फों से कहर
आजकल यूं सीने में आग लगाती भी नहीं अब
कोयल सी मीठी आवाज में वो गाना
आजकल पता नहीं गुनगुनाती भी नहीं अब
सीने से मुजको लगाती भी नहीं अब ,
किस्सा ए महोब्बत सुनाती भी नहीं अब


