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बचपन के वो मनोहर पल

वह निश्छल मन से मुस्काना, मिट्टी को अमी बना खाना, अवनि को ही बना पालना, परियों की दुनिया में खो जाना,   बचपन के वो मनोहर पल , रह गए स्मृति बन कर । कुछ करने से न कतराना, माँ -पापा का  फिर आँख दिखाना, मोटे -मोटे अश्रु मेरा बहाना और दादाजी का फौरन मनाना,   बचपन के वो मनोहर पल , उड़ गए खग बन कर । दादी की राजा -रानी की कहानी सुन
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