सही कहा तुमने

हम चुप हो जाते हैं स्त्री की इस पीड़ा पर

लिखते हैं स्त्री की हर एक पहलू पर

ऑंख, होंठ, चेहरा, बाल आदि

यहाँ तक की उसके गहनों पर भी

लेकिन चुप रह जाते हैं इस असीम वेदना पर

जो हर महीने पीड़ित करती है हर स्त्री को

माँ, बहन, पत्नी तथा प्रेमिका को।