ज्ञात रहे!
गर प्रेम अमर करना हो
मन में केवल करुणा हो

ज्ञात रहे!
नयनों से नयनों के संचल होंगे
एक लड़ाई नजरो से नजरो की होगी
प्रेम प्रमाणित भी करना होगा
अधरों की पुष्टि अधरों से होंगी

ज्ञात रहे!
दूर प्रिय से रहना होगा
विरह का बाण सहना होगा

ज्ञात रहे!
व्याह से पहले!
प्रीतम का देह सक्रिय हो ना पायें
एक ऐसे प्रण का अमृत चखना होगा
प्रेम पूर्ण करने का सूत्र यही हैं
प्रेम को पूर्णतः निजी रखना होगा

...... @संदीप राजपूत