एक शेर आपकी नज़रशहर के सूनेपन से घबरा के जो मांगे महफिलों के गांवकहे जिंदगी की धूप, दूर जा बसी है दोस्तों की छाँव
एक शेर आपकी नज़र
शहर के सूनेपन से घबरा के जो मांगे महफिलों के गांवकहे जिंदगी की धूप, दूर जा बसी है दोस्तों की छाँव