ये मेरी पहली पेशकश है यहाँ, आपकी नज़र


ये कोविद के दौरान लिखी गयी थी


एक नया सवेरा

कंधे अगर बोझ से डगमगा जाए

और पाँव थकावट से सहम के लड़खड़ाए

हारना नहीं, टूटना नहीं, डरना नहीं है तूझको

दो पल विश्राम कर ले, रुकना नहीं है तुझको

दिल की गहराई में एक नन्हा सा अरमान सहमी सी अंगड़ाई लेता है

वक्त का ये दौर क्या कोई संदेश देता है

पत्तों के चेहरों पे हलकी सी मुस्कान है

पेड़ों की शाखों पे सदियों का आराम है

चिड़ियों के चहकने में सुर ताल का है संगम

तितलियों के पंखों में रंगों का है संगम

हवाओं की सरसराहट में यौवन बलखाता है

धरती लहलहाती है, गगन इठलाता है


वसुंधरा के अरमानों में दुल्हन की महक है

तारों की झिलमिलाहट में सूरज की दमक है

अंधेरे के समुद्र में, दूर, हौसले का दीप जलता है

सब्र कर देख, कल के सवेरे में इक नया आगाज़1 पलता है


1.DAWN