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Ishq


दिल ही दिल में एक बात दबी है में कहूं कैसे,मन में मेरे जज़्बात कई है छुपाऊं कैसे,

चाहा तो था जाकर उनसे सब कुछ कह दूं,नजर उनकी खामोश कर देती है बताऊं कैसे।

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