बहुत रोकना चाहा जिसे,वही मुँह मोड़ गया।जाते जाते बेदर्द चोट गहरी दे गया।ज़ख़्म तन का था,पर दिल को दर्द दे गया।जिसको भुलाना था,उसकी निशानी छोड़ गया।