तन्हाई में खुद से मुलाकात है ज़रूरी।
दुनियादारी निभाते निभाते,
दिल क्या चाहे
ये सोचने की फ़ुर्सत ही नहीं मिलती।
दिल की बात जानना भी है ज़रूरी।
माना अपनों की खुशी के लिए,
हर मुमकिन कोशिश है ज़रूरी।
पर खुद को चाहना,
और खुश रखना भी उतना ही है ज़रूरी।
-सम्रिता®
