अलमारी के एक कोने में,
थी एक पुरानी सी क़िताब।
अचानक एक अरसे बाद उस पर नज़र पड़ी।
क़िताब हाथ में लेकर उसके कुछ पन्ने पलटे।
क़िताब के बीच मिला,
एक सूखा हुआ, पीला गुलाब का फ़ूल।
याद आ गई कुछ भूली बिसरी बातें।
ना जाने क्यों ऐसा लगा जैसे,
गुलाब की सूखी पंखुड़ियों में अभी भी भीनी भीनी खुशबू थी।
खुशबू दोस्ती की।
क़िताब की कहानी भी,
दोस्ती पर ही आधारित थी।
मित्रता दिवस पर हम सभी दोस्तों ने,
इस क़िताब की एक-एक कापी ली थी।
और लिया था एक पीला गुलाब का फ़ूल।
हमारी दोस्ती की निशानी।
उस गुलाब की पंखुड़ियों सी कसी हुई थी दोस्ती हमारी।
उस फ़ूल को देख कर ये महसूस हुआ कि
वक्त आ गया है,
फ़िर बिछड़े हुए यार दोस्तों से मिलने का।
उन बीते हुए दिनों को वापस बुला रहा था,
वो पीला फ़ूल गुलाब का।
#सम्रिता®
