बस्तीवालों ने बस कुछ पेड़ काटे।
ना जाने क्यों छांव गुम हो गई।
पंछी गुम हो गए।
ना अब पत्तों की सरसराहट सुनाई देती है 
ना पंछियों की चहक।
हवा जाने क्यों गुमसुम है। 
बारिश भी अब ठीक से होती नहीं।
सूरज गुस्से से गुर्राता है। 
बस्ती की मानों रौनक गुम हो गई है।
बस्तीवालों ने सिर्फ़ कुछ पेड़ काटे। 
सम्रिता®