तुम कहते हो कि हुस्न क़यामत है।
पर सच तो ये है कि,
जब से तुझको जाना है,
तब से ख़्वाबों, ख़्यालों में तुम ही को पाया है।
शर्मा कर झुक गईं हैं पलकें,
जब भी तेरा ज़िक्र आया है।
एक हसीं इल्ज़ाम दुनिया ने लगाया है मुझ पर।
मेरी निगाहों में अक्सर,
अक्स तेरा नज़र आया है।
दुनिया पूछती है मुझ से,
कि ये कौन शख़्स है जिस पर,
मेरी निगाहों ने करम फ़रमाया है!
-सम्रिता®