नदिया के पार,
सड़क है शहर की ओर जाने वाली।
कईं चले गए,
नौकरी की तलाश में।
नौकरी मिली,
पर जीना भूल गए।
ज़िंदगी पीछे छोड़ गए।
नदिया के इस पार,
छोटासा गांव,
पेड़ों की छांव,
सौंधी मिट्टी की खुशबू,
झूमती फसलें,
यहां की सादगी,
बूढ़े माता-पिता और
सारे अपने
सब यही तो छूट गए
नदिया के इस पार
-सम्रिता®