मैं जब चली,मेरे साथ चली पुरवाई।महक उठी बगिया,कलियां भी मुस्कराई।चहक उठे पंछी,मेरे साथ ज़िंदगी भी गुनगुनाई,वादियों में जैसे गूँज उठी शहनाई।