Poetry 1 min read 617.6K reads

मेरे साथ


मैं जब चली,मेरे साथ चली पुरवाई।महक उठी बगिया,कलियां भी मुस्कराई।चहक उठे पंछी,मेरे साथ ज़िंदगी भी गुनगुनाई,वादियों में जैसे गूँज उठी शहनाई।

— सम्रिता®
Read more Earn more Learn more