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लकीरें


हम इंसानों की ज़िंदगी,हो लकीरों से शुरू, लकीरों पे ख़तम।

दुनिया की, देश की लकीरें,समाज की, सोच की लकीरें,

भावनाओं की, आस्थाओं की लकीरें।लिखित-अलिखित नियमों की लकीरों में सीमित हैं हम।

— सम्रिता®
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