हम इंसानों की ज़िंदगी,हो लकीरों से शुरू, लकीरों पे ख़तम।दुनिया की, देश की लकीरें,समाज की, सोच की लकीरें,भावनाओं की, आस्थाओं की लकीरें।लिखित-अलिखित नियमों की लकीरों में सीमित हैं हम।
हम इंसानों की ज़िंदगी,हो लकीरों से शुरू, लकीरों पे ख़तम।
दुनिया की, देश की लकीरें,समाज की, सोच की लकीरें,
भावनाओं की, आस्थाओं की लकीरें।लिखित-अलिखित नियमों की लकीरों में सीमित हैं हम।