ज़िम्मेदारियां कईं थीं उन कंधों पर,पर उन्हें उनका एहसास ना था।वो कठपुतली बने हुए थे,उनका अपना कोई वजूद ना था।हक़ीक़त से वाकिफ़ है दुनिया सारी।पर उन्हें सही-ग़लत का होश ना था।
ज़िम्मेदारियां कईं थीं उन कंधों पर,पर उन्हें उनका एहसास ना था।
वो कठपुतली बने हुए थे,उनका अपना कोई वजूद ना था।
हक़ीक़त से वाकिफ़ है दुनिया सारी।पर उन्हें सही-ग़लत का होश ना था।