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कठपुतली©


ज़िम्मेदारियां कईं थीं उन कंधों पर,पर उन्हें उनका एहसास ना था।

वो कठपुतली बने हुए थे,उनका अपना कोई वजूद ना था।

हक़ीक़त से वाकिफ़ है दुनिया सारी।पर उन्हें सही-ग़लत का होश ना था।

— सम्रिता®
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