बारिश में धुलकर धरती निखर जाए।

हरीभरी साड़ी में दुल्हन जैसे सज-सवर जाए।

उछलते कूदते खिलखिलाते झरने,

शीतल चमकीले जैसे हीरे के हो गहने।

दूल्हा बन सूरज बादलों की बारात ले आए।

सुंदर सजीली धरती देख,

मुस्कुराकर वह लाली छलकाए।

सुनहरे किरणों में पिरो के बारिश की बूंदें, 

इंद्रधनुषी वरमाला धरती को पहनाए।

देख कर यह मनोहर दृश्य, 

दिल से यही दुआ निकले,

“बनी रहे इनकी जोड़ी, धरती और सूरज सदा मुस्कुराएं।"

~सम्रिता©