सूरज की रोशनी में
हर चीज़ कहाँ उजागर होती है?
रात के अंधेरे में
चांद की चांदनी चमकती है।
चांदनी रातों में,
रातरानी के फ़ूल महकते हैं।
अंधियारी रातों में ही,
टिम टिम जुगनू भी दमकते हैं।
चाँद जब झील में झाँक कर मुस्कराता है,
दिल को कितना लुभाता है।
उस चांद में, मेरा भी चांद नज़र आता है।
मंद मंद ठंडी हवा के झोंकों पर,
झील की लहरें मचलती हैं, गुदगुदाती है।
धीमी सी, मिठी सी धुन सुनाती है।
ऐसे आलम में,
संग साजन हो,
तो ज़िंदगी जैसे उन्हीं पलों में ठहर जाती है।
ऐसी चांदनी रातें बड़ी हसीन होती हैं,
मन को सुकून देती हैं।
सम्रिता®
