ज़र्रा ज़र्रा मेरा दिल बटा है मेरे अपनों में।
एक ड़ोर में सबको पिरो कर नहीं रखूं,
तो बिखर जाऊं मै।
मेरे अपनों के साथ से ही, 
मेरी दुनिया हसीन है। 
उनकी मोहब्बत ही, 
मेरा आसरा है।
इस आसरे में, 
ये दिल महफ़ूज़ है।
ये आसरा ना हो तो किधर जाऊँ मैं। 
सम्रिता®