अपनों को लड़ते देख,महसूस हुआ यूँ कि,टूटे शीशे में खुद काबिखरा अक्स देखा हो जैसे।अपनों से मिली चोट इस तरह कि,फूलों की चाह में मिली,काटों की #चुभन हो जैसे।
अपनों को लड़ते देख,
महसूस हुआ यूँ कि,टूटे शीशे में खुद काबिखरा अक्स देखा हो जैसे।अपनों से मिली चोट इस तरह कि,फूलों की चाह में मिली,काटों की #चुभन हो जैसे।