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अपने


अपनों को लड़ते देख,

महसूस हुआ यूँ कि,टूटे शीशे में खुद काबिखरा अक्स देखा हो जैसे।अपनों से मिली चोट इस तरह कि,फूलों की चाह में मिली,काटों की #चुभन हो जैसे।

— सम्रिता®
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