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अनजाने रास्ते


जाना पहचाना सा मंज़र है,पर ना जाने क्यों ये रास्ते अजनबी लगते हैं।तुझ तक पहुंचना था मगर,ये अचानक किसी अनजान मोड़ पर मुड़ गए हैं।और अब दूर दूर तक कहीं,तेरा नामोनिशान तक नहीं।ऐसा लगता है कि हम खुद से बिछड गए हैं।

— सम्रिता®
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